जानिए क्या होती है ' चुनाव आचार सहिंता '
चुनाव आयोग ने आज शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस का कार्यक्रम रखा है , माना जा रहा की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों की घोषणा हो सकती है।
लोकसभा चुनाव के साथ कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने है , ऐसे में चुनाव आयोग इन राज्यों के विधानसभा चुनावो के सम्बन्ध में भी कुछ ऐलान कर सकता है।
पिछले कुछ वर्षो को देखे तो चुनाव आयोग जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव साथ होने है तो वहा आयोग दोनों को एक साथ संपन्न करता रहा है।
यदि इस प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव आयोग चुनाव के तारीखों की घोषणा कर देता है तो पूरे देश में चुनाव आचार सहिंता लागू हो जाएगी।
चुनाव आचार सहिंता (Model Code of Couduct)
चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही वहां चुनाव आचार सहिंता लागू हो जाती है। सहिंता के लागू होते ही सभी प्रशासनिक अधिकारी चुनाव के अधीन कार्य करते है इन अधिकारियो का तबादला सरकार बिना चुनाव आयोग के अनुमति के नहीं कर सकती है। सरकार के विभिन्न कार्यो पर कई प्रकार के अंकुश लग जाते है।
चुनाव आचार सहिंता प्रभावी होते के बाद सरकार कोई भी घोषणा नहीं कर सकती है , न शिलान्यास , लोकार्पण और न ही भूमिपूजन कर सकती है। सरकार किसी भी प्रकार का आयोजन नहीं कर सकती है जिससे की सत्ताधारी पार्टी को चुनाव में कोई फ़ायदा पहुँच सके।
किसी भी राजनितिक दल या प्रत्याशी को रैली या मीटिंग करने के लिए पुलिस से इज़ाज़त लेनी होती है। चुनाव आयोग सभी राजनितिक दलो पर नज़र रखता है। इस कार्य के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।
सरकार के मंत्री प्रचार के दौरान सरकारी बंगले , सरकारी पैसे , सरकारी गाड़ी या सरकारी एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकते। कोई भी दल यदि चुनावी सभा का आयोजन करता है तो उसे पुलिस से इज़ाज़त लेनी पड़ती है और इस सभा के आयोजन में सरकारी पैसे का इस्तेमाल नहीं कर सकता , चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी दल जाति और धर्म के आधार पर वोट की अपील नहीं कर सकता है।
वोटिंग के दौरान चुनाव आयोग के बिना अनुमति के किसी भी राजनितिक दल का प्रतिनिधि पोलिंग बूथ के अंदर नहीं जा सकता। राजनितिक पार्टियां अपने कार्यकर्ताओ को आइडेंटिटी कार्ड देना होता है।
हो सकती है सजा
यदि कोई भी इन नियमो का पालन नहीं करता है तो चुनाव आयोग को कार्यवाही करने का भी अधिकार भी होता है। चुनाव आयोग नियमो का पालन नहीं करने पर उमीदवार को चुनाव लड़ने से भी रोक सकता है। उमीदवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर जेल भी जाना पड सकता है।


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